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Vedic Literature वैदिक साहित्य उपनिषद Aranyakas Upved Ramayan Puraan ancient history of india part 3

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The Vedas are the large bodies of religious text that is composed of Vedic Sanskrit and originated in ancient India. They form the oldest scriptures of Hinduism and the oldest layer of Sanskrit literature. The Vedas are said to have passed on through verbal transmission from one generation to the next. Therefore, they are also known as Shruti. The Vedic literature consists of four Vedas, namely: Rig Veda, Sama Veda, Yajur Veda, and Atharva Veda. The mantra text of each of the Vedas is called Samhita.

Types of Vedic Literature
There are broadly two types of Vedic literature:

Shruti Literature – The word ‘Shruti’ from the term ‘Shruti Literature’ means ‘to hear’ and describes the sacred texts which comprise of Vedas, Brahmanas, Aranyakas, & Upanishads. Shruti Literature is canonical, consisting of revelation and unquestionable truth, and is considered eternal.
Smriti Literature – Whereas, the word ‘Smiriti’ literally means to be remembered and which is supplementary and may change over time. Smriti Literature is the entire body of the post-Vedic Classical Sanskrit literature and consists of Vedanga, Shad darsana, Puranas, Itihasa, Upveda, Tantras, Agamas, Upangas.
The Vedic literature can be classified into the following categories:

The four Vedas i.e. the Rig, Sama, Yajur, and Atharva, and their Samhitas. (Learn the difference between Vedas and Puranas in the linked article.)
The Brahmanas
The Aranyakas
The Upanishads

वैदिक साहित्य से तात्पर्य उस विपुल साहित्य से है जिसमें वेद, ब्राह्मण, अरण्यक एवं उपनिषद् शामिल हैं। वर्तमान समय में वैदिक साहित्य ही हिन्दू धर्म के प्राचीनतम स्वरूप पर प्रकाश डालने वाला तथा विश्व का प्राचीनतम् स्रोत है। वैदिक साहित्य को ‘श्रुति’ कहा जाता है, क्योंकि (सृष्टि/नियम)कर्ता ब्रह्मा ने विराटपुरुष भगवान् की वेदध्वनि को सुनकर ही प्राप्त किया है। अन्य ऋषियों ने भी इस साहित्य को श्रवण-परम्परा से ही ग्रहण किया था तथा आगे की पीढ़ियों में भी ये श्रवण परम्परा द्वारा ही स्थान्तरित किये गए। इस परम्परा को श्रुति परम्परा भी कहा जाता है तथा श्रुति परम्परा पर आधारित होने के कारण ही इसे श्रुति साहित्य भी कहा जाता है।

वैदिक साहित्य के अन्तर्गत ऊपर लिखे सभी वेदों के कई उपनिषद, आरण्यक इनकी भाषा संस्कृत है जिसे अपनी अलग पहचान के अनुसार वैदिक संस्कृत कहा जाता है – इन संस्कृत शब्दों के प्रयोग और अर्थ कालान्तर में बदल गए या लुप्त हो गए माने जाते हैं। ऐतिहासिक रूप से प्राचीन भारत और हिन्दू-आर्य जाति के बारे में इनको एक अच्छा सन्दर्भ माना जाता है। संस्कृत भाषा के प्राचीन रूप को लेकर भी इनका साहित्यिक महत्त्व बना हुआ है।

रचना के अनुसार प्रत्येक शाखा की वैदिक शब्द-राशि के चार भाग हैं। वेद के मुख्य मन्त्र भाग को संहिता कहते हैं। संहिता के अलावा हरेक में टीका अथवा भाष्य के तीन स्तर होते हैं। कुल मिलाकर ये हैं:

संहिता (मन्त्र भाग)

ब्राह्मण-ग्रन्थ (गद्य में कर्मकाण्ड की विवेचना)

आरण्यक (कर्मकाण्ड के पीछे के उद्देश्य की विवेचना)

उपनिषद (परमेश्वर, परमात्मा-ब्रह्म और आत्मा के स्वभाव और सम्बन्ध का बहुत ही दार्शनिक और ज्ञानपूर्वक वर्णन)

जब हम चार ‘वेदों’ की बात करते हैं तो उससे संहिता भाग का ही अर्थ लिया जाता है। उपनिषद (ऋषियों की विवेचना), ब्राह्मण (अर्थ) आदि मंत्र भाग (संहिता) के सहायक ग्रंथ समझे जाते हैं। वेद 4 हैं – ऋग्वेद, सामवेद, यजुर्वेद व अथर्ववेद।

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